Breaking News :
>>परिणाम आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों को रोजगार के साथ रोजगार सृजन के लिए तैयार करना जरूरी: कुलपति>>कार्यक्रम स्थगित कर आपदा प्रभावितों के बीच पहुंचे डॉ. धन सिंह रावत>>जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में जिला कौशल एवं अप्रेंटिसशिप समिति की समीक्षा बैठक सम्पन्न>>देहरादून में पंचायत उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित, 30 सितंबर से भरे जाएंगे नामांकन पत्र>>अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र ने बाड़ेछीना स्वास्थ्य केंद्रों का किया औचक निरीक्षण, अनुपस्थित कार्मिकों पर मांगा स्पष्टीकरण>>मौहब्बेवाला ब्लैक स्पॉट पर हादसों की रोकथाम को तैनात रहेगी टास्क फोर्स; डीएम ने 24×7 पेट्रोलिंग एवं सघन चेकिंग के दिए निर्देश>>कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने सुनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’, कहा ‘मन की बात’ है राष्ट्रहित और जनभागीदारी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम>>कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सुनी पीएम के मन की बात, बोले- सामाजिक कार्य की प्रेरणा देता है प्रत्येक एपिसोड>>प्रधानमंत्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए करता है प्रेरित -मुख्यमंत्री>>सहकारिता चुनाव में नया रिकॉर्ड, सभी 10 जिला सहकारी बैंकों में निर्विरोध चुने गए पदाधिकारी>>घर में जमा पानी बन सकता है मलेरिया की वजह, बरसात में ऐसे करें मच्छरों की रोकथाम>>मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने गंगोत्री धाम में की पूजा-अर्चना>>1098 पर कॉल करें, मुसीबत में बच्चों को मिलेगी मदद>>विकासखंड कोट में सेवा संकल्प अभियान के बहुउद्देशीय शिविर में उमड़ा उत्साह>>रोजाना ब्रोकली खाने से शरीर को मिलते हैं ये 5 बड़े फायदे, हड्डियां भी होंगी मजबूत>>बांग्लादेश में ड्रम के अंदर मिला हिंदू ज्वैलर का शव, सिर-छाती पर धारदार हथियार के निशान>>आंगनबाड़ी केंद्र है बच्चों के भविष्य की बुनियाद रखने का प्रथम आयाम- रेखा आर्या>>SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर 30 सितंबर को बैठक कर सकता है INDIA गुट>>विद्यार्थी और किसान देश की प्रगति के आधार- गणेश जोशी>>लेखपाल-पटवारियों के लिए नया फरमान, जाति-आय और निवास प्रमाण-पत्र से पहले करना होगा स्थलीय सत्यापन
उत्तराखण्ड

घास को आस में बदल रहीं महिलाएं, मलेशिया तक धूम

हल्द्वानी : कहने को ये थारू जनजाति की साधारण सी महिलाएं हैं, लेकिन इनके हाथों में असाधारण हुनर है। घास को खास आकार देकर इन्होंने अपने जीवन को नई आस और एक खास मकसद दे दिया।

घास से बनाए गए इनके फूलदान, श्रृंगार दान और सुंदर टोकरियों को अब विदेशी बाजार मिलना शुरू हो गया है। यह इनकी मजबूत इच्छाशक्ति और मन से की गई मेहनत का ही परिणाम है।

कुश घास से बनाती हैं उत्पाद

यह कहानी है उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में रहने वाले थारू परिवारों की महिलाओं की। इन्होंने यहां बहुतायत में उगने वाली कुश नामक घास को अपनी तरक्की का आधार बनाया। इनके बनाए हस्त निर्मित उत्पादों को एक नई पहचान मिली है। घास से बनाए गए ये उत्पाद महिला समूह के माध्यम से मलेशिया को निर्यात किए जा रहे हैं।

काम आया प्रशासन का सहयोग

जिले के सितारगंज और खटीमा ब्लॉक में रहने वाली थारू महिलाएं परंपरागत रूप से टोकरी निर्माण का काम करती आई हैं। लेकिन प्रशासन ने इनकी इस प्रतिभा को नया आयाम देने का प्रयास किया तो नई राहें बनती गईं। साल 2002 में स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना के तहत इन महिलाओं को समूहों के रूप में संगठित किया गया।

दो साल पहले समूहों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गोद लेकर इनके द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का काम शुरू हुआ। सितारगंज ब्लॉक के नकुलिया गांव में लक्ष्मी और दुर्गा स्वयं सहायता समूह की 20 महिलाएं इस समय हैंडी क्राफ्ट बना रही हैं।

सितारगंज की बीडीओ मीना मैनाली के अनुसार देशभर में लगने वाले राष्ट्रीय सरस मेले में महिलाओं के बनाए उत्पाद बिकते हैं। पिछले साल दिल्ली के प्रगति मैदान में लगे स्टॉल में मलेशिया को निर्यात करने वाली एक एजेंसी ने इनके उत्पादों में रुचि दिखाई। 16 जनवरी को पहली खेप मलेशिया भेजी गई है। अब मलेशिया से आ रही डिमांड के अनुरूप ये उत्पाद तैयार करने में जुट गई हैं।

ये उत्पाद हो रहे निर्यात

कुश घास से विभिन्न डिजाइन के फूलदान, फल की टोकरी, मेकअप बॉक्स, फ्लावर पॉट, श्रृंगार बॉक्स आदि तैयार किए जा रहे हैं। भारतीय बाजारों में इनकी कीमत 50 रुपये से 300 रुपये तक है, तो मलेशिया भेजने पर 150 रुपये से 800 रुपये प्रति नग कीमत मिल रही है।

बरसात में मिलती है घास

दुर्गा स्वयं सहायता समूह की सदस्य बब्बी राणा बताती है कि कुश घास के बने उत्पाद अधिक मुलायम, रंगीन और आकर्षक होते हैं, इसलिए इनकी मांग अधिक रहती है। कुश घास नदियों के आसपास अधिक पाई जाती है। बरसात के दिनों में महिलाएं जंगल जाकर इसे काट लेती हैं। बाद में धूप में सुखाने के बाद जरूरत के अनुरूप सामग्री बुने जाते हैं।

क्या है कुश घास 

कुश घास का वैज्ञानिक नाम एरग्रास्टिस साइनोसोरिड्स है। इसकी पत्तियां नुकीली, तीखी व कड़ी होती हैं। हैंडी काफ्ट के साथ इसकी चटाई भी बनती है। कुश पानी में एकाएक खराब नहीं होता। इसे धार्मिक अनुष्ठानों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

 

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!