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उत्तराखण्ड कैबिनेट में वरिष्ठ मंत्री प्रकाश पंत का आकस्मिक निधन

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कैबिनेट में अपने सहयोगी, प्रकाश पंत के निधन पर गहरा दुख जताया

देहरादून। उत्तराखण्ड कैबिनेट में वरिष्ठ मंत्री, उत्तराखण्ड के जन जन के दिलों में राज करने वाले, सौम्य स्वभाव के धनी, संसदीय मामलों के ज्ञाता व एक कुशल व्यक्तित्व हमारे बीच नहीं रहे। वित्त मंत्री प्रकाश पंत का आकस्मिक निधन बुधवार, ५ जून २०१९ को अमेरिका में ईलाज के दौरान हो गया। कैंसर से पीड़ित होने पर अमेरिका में उनका इलाज चल रहा था। जैसे ही उनके निधन की सूचना मिली तो उत्तराखण्ड में शोक की लहर दौड़ पड़ी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कैबिनेट में उनके सहयोगी, प्रकाश पंत के निधन पर गहरा दुख जताया। सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द करते हुए राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया है। प्रकाश पंत मूलरूप से चोढियार (गंगोलीहाट) पिथौरागढ़ के रहने वाले थे, लेकिन बाद में वे खड़कोट (पिथौरागढ़) में बस गए थे। 59 वर्षीय प्रकाश पंत अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र व दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं। वह बीते कुछ माह से अस्वस्थ चल रहे थे और पिछले सप्ताह ही बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली से अमेरिका ले जाया गया था। सूत्रों के अनुसार शनिवार तक उनका पार्थिव शरीर दिल्ली होते हुए जौलीग्रांट एअर-पोर्ट लाया जायेगा , जहाँ से फिर उन्हें पिथौरागढ़ होते हुए उनके पैतृक गांव ले जाया जायेगा। उनका अंतिम संस्कार पिथौरागढ़ में किया जाएगा।
वित्त मंत्री काफी समय से बीमारी से जूझ रहे थे। फरवरी, 2019 में बजट सत्र के दौरान अचानक भाषण देते समय वे बेहोश होकर गिर गए थे। इसके बाद उन्होंने अपना चेकअप कराया था, लेकिन तब कोई गंभीर बीमारी का पता नहीं चल पाया था। स्वास्थ्य में सुधार न होने पर मार्च के अंतिम सप्ताह में वे दून स्थित मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती हुए। इसी दौरान उन्हें को कैंसर होने की पुष्टि हुई, लेकिन किसी को इसका आभास नहीं था कि कैंसर उनके शरीर में इतना फैल चुका है। इसके बाद उन्हें दिल्ली स्थित राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था। वहां भी स्वास्थ्य में सुधार न होने पर बीती 29 मई को परिजन उन्हें इलाज के लिए अमेरिका ले गए। बुधवार को पंत के निधन की सूचना मिलते ही उत्तराखंड में शोक छा गया। प्रकाश पंत मंत्री के रूप में सरकार में नंबर दो की पोजिशन पर थे। वित्त मंत्री प्रकाश पंत के निधन की खबर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दुख जताया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट कर लिखा, ‘’उत्तराखंड में मेरे वरिष्ठ सहयोगी एवं प्रदेश के वित्तमंत्री श्री प्रकाश पंत जी का अमेरिका में इलाज के दौरान स्वर्गवास होने का समाचार पा कर मैं स्तब्ध भी हूँ और व्यथित भी। प्रकाश जी का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत एवं अपूर्णीय क्षति है, उनके निधन से हमारा तीन दशक पुराना साथ यादों में रह गया। प्रकाश पंत्र के रूप में मैने अपना छोटा भाई खोया है। वह केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि आकर्षक व्यक्तित्व के धनी थे।” वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रकाश पंत के निधन पर दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि ”उत्तराखण्ड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत के आकस्मिक निधन की खबर से दुखी हूॅ। उनकी सांगठनिक क्षमता ने भाजपा को मजबूत किया और उनकी प्रशासनिक क्षमता ने उत्तराखण्ड की प्रगति में अहम योगदान दिया। मेरी संवेदना उनके परिवार और उनके समर्थकों के साथ है।”
मृदुभाषी और सरल व्यवहार के धनी कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के निधन से उत्तराखण्ड की सियासत में जो रिक्तता आई है, उसकी भरपाई अर्से तक शायद ही हो पाए। नगर पालिका परिषद के सदस्य से सियासी पारी शुरू करने वाले पंत ने विधायक, स्पीकर और कैबिनेट मंत्री के तौर पर जो भी दायित्व मिला उसमें विशिष्ट छाप छोड़ी। उनकी ज्ञानार्जन की ललक और विषयों पर पकड़ का सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष ने भी लोहा माना। अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि फार्मासिस्ट होने के बावजूद उन्होंने वित्त, संसदीय व विधायी कार्यों में महारथ हासिल की। वित्त विशेषज्ञ के तौर पर जीएसटी काउंसिल में उन्हें और उनके सुझावों को भरपूर तवज्जो दी गई।
सन 1977 में छात्र राजनीति में वह सक्रिय हुए और सैन्य विज्ञान परिषद में महासचिव चुने गए। पेशे से फार्मासिस्ट पंत ने सन 1984 में सरकारी सेवा को त्याग कर समाजसेवा के लिए सियासत का रास्ता चुना। सन 1988 में नगर पालिका परिषद पिथौरागढ़ के सदस्य चुने जाने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अविभाजित उत्तर प्रदेश में सन 1988 में वह विधान परिषद के सदस्य चुने गए और वहाॅ भी अपने सवालों के जरिये छाप छोड़ी। नौ नवंबर, 2000 को उत्तराखण्ड राज्य का जन्म हुआ तो उन्हें अंतरिम विधानसभा के स्पीकर की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान उन्होंने अपने संसदीय ज्ञान और विधायी कौशल का बखूबी परिचय दिया। सन 2007 में भाजपा की सरकार में उन्होंने संसदीय कार्य, विधायी पेयजल, श्रम, निर्वाचन, पुनर्गठन व बाह्य सहायतित परियोजना मंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। इस दौरान भी उनके संसदीय ज्ञान और विधायी कौशल को हर किसी ने सराहा।
भाजपा की मौजूदा सरकार में भी वह कैबिनेट मंत्री के रूप में संसदीय कार्य, विधायी, भाषा, वित्त, आबकारी, पेयजल एवं स्वच्छता, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग का दायित्व देख रहे थे। इस कार्यकाल में वह वित्त के विशेषज्ञ के तौर पर उभरे व हर मोर्चे पर सरकार को संभालते भी नजर आए। वित्त पर अपनी मजबूत पकड़ के साथ ही जीएसटी की बारीकियों की जानकारी के बूते उन्होंने कई सुझाव काउंसिल को दिए। जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के मद्देनजर वार्षिक टर्नओवर की सीमा से संबंधित मसले भी सुलझाने में उनकी अहम भूमिका रही। उनके संसदीय ज्ञान और विधायी कौशल का हर कोई मुरीद था, सत्ता पक्ष भी और विपक्ष भी। जब कभी सरकार किसी विषय पर कहीं भी उलझी तो उसे निकालने में वह संकटमोचक बनकर उभरे। प्रदेश हित को उन्होंने सर्वोपरि रखा और इसके लिए सदन और सदन के बाहर संघर्ष किया। मौजूदा विधानसभा के अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल कहते हैं कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से कैबिनेट मंत्री पंत का सहयोग मिलता रहा। काबीना मंत्री प्रकाश पंत्र को वर्ष सन 2008 में उत्कृष्ट विधायक के पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

प्रदेश एवं भाजपा संगठन ने एक बहुत बड़ा व्यक्तित्व को खो दिया।

मुख्यमंत्री ने स्व० प्रकाश पंत के सम्मान में प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक तथा गुरूवार 6 जून को प्रदेश में एक दिन के राजकीय अवकाश की घोषणा की है।

 

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Ghanshyam Chandra

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