Breaking News :
>>क्या आपकी भी सीढ़ियां चढ़ते ही फूलने लगती है सांस? तो जान लीजिये इसके पीछे के कारण>>मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए ₹ 62 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति>>उत्तरांचल प्रेस क्लब में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक मनोज इष्टवाल को किया गया सम्मानित>>स्वर्गीय श्याम दत्त जोशी की स्मृति में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने गढ़ी डाकरा की जनता को समर्पित किया पानी का टैंक>>उत्तराखंड में जीएसटी संग्रहण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, नेट एसजीएसटी 24% बढ़ा>>केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया अपने पद से इस्तीफा>>भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला आज>>भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.23 अरब डॉलर पहुंचा, आरबीआई के ताजा आंकड़े जारी>>‘जन नायकन’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा, दो दिन में पार किया 50 करोड़ का आंकड़ा>>शिक्षक बनने का सुनहरा मौका,16 अगस्त को होगी संयुक्त बीएड-एमएड प्रवेश परीक्षा>>मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक>>ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंसः हर युवा का भविष्य बचाना हमारी प्राथमिकता- डीएम>>उत्तराखंड पुलिस के निलंबित सिपाही शेर सिंह के तथाकथित “इस्तीफे” को लेकर उठे सवाल>>मुख्यमंत्री ने ‘रन फॉर कारगिल हीरोज’ मैराथॉन को दिखायी हरी झंडी>>ग्राफिक एरा ग्लोबल स्कूल में फ्रैंक एंथोनी मेमोरियल ऑल इंडिया अंतर विद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता (वर्ग एक) सम्पन्न>>लोनिवि मंत्री महाराज ने किया मसूरी, कोल्हूखेत, पानी वाले बैंड सड़क का औचक निरीक्षण>>फिल्म अभिनेता अमन वर्मा ने की फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी से भेंट>>टिहरी मेडिकल कॉलेज के निर्माण से स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई दिशा : स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल>>लोनिवि मंत्री महाराज ने किया मसूरी, कोल्हूखेत, पानी वाले बैंड सड़क का औचक निरीक्षण>>वन्य जीव आधारित पयर्टन से बढ़ाई जाए स्थानीय लोगों की आर्थिकी : मुख्यमंत्री धामी
उत्तराखण्डधार्मिकपर्यावरणविशेषसामाजिक गतिविधियाँसुर्खियाँ

उत्तराखण्ड का लोक पर्व, हरियाली का प्रतीक ‘हरेला’

हरियाली का प्रतीक ‘हरेला’ उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण व प्रसिद्ध लोकपर्व है

 

 हरेला पर्व के उपलक्ष में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री माननीय त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वृक्षारोपण कर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभ कामनायें प्रेषित की।

“जी रया जागि रया आकाश जस उच्च,

धरती जस चाकव है जया स्यावै क जस बुद्धि, 

 सूरज जस तराण है जौ सिल पिसी भात खाया,

जाँठि टेकि भैर जया, दूब जस फैलि जया…”

देवभूमि उत्तराखंड की धरती पर ऋतुओं के अनुसार अनेकों त्यौहार मनाये जाते हैं । यह लोक पर्व हमारी संस्कृति को उजागर करने के साथ ही पहाड़ की परंपराओं को भी कायम रखने में सहायक होते हैं । इन्हीं खास पर्वो में शामिल “हरेला” उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण व प्रसिद्ध लोकपर्व है | उत्तराखंड में इस त्योहार की काफी मान्यता है |
हरियाली का प्रतीक ‘हरेला’ हिन्दुओं का प्रसिद्ध त्यौहार है जो मूल रूप से उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में मनाया जाता है । हरेला पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण की प्रेरणा देता है। उत्तराखण्ड में हरेला के त्यौहार को वृक्षारोपण त्यौहार के रुप में भी मनाया जाता है। श्रावण मास के हरेला त्यौहार के दिन घर में हरेला पूजे जाने के उपरान्त एक-एक पेड़ या पौधा अनिवार्य रुप से लगाये जाने की भी परम्परा है। माना जाता है कि श्रावण मास के ‘हरेला’ के दिन किसी भी पेड़ की टहनी को मिट्टी में गाड़ दिया जाय तो पांच-छः दिनों के बाद उसमें जड़े निकल आती हैं और यह पेड़ हमेशा जीवित रहता है।
हरेले का पर्व हमें नई ऋतु के शुरु होने की सूचना देता है। उत्तराखण्ड में मुख्यतः शीत, ग्रीष्म और वर्षा तीन ऋतुयें होती हैं । यह त्यौहार हिन्दी, सौर पंचांग की तिथियों के अनुसार मनाया जाता है। शीत ऋतु की शुरुआत आश्विन मास से होती है, अतः आश्विन मास की दशमी को हरेला मनाया जाता है। ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत चैत्र मास से होती है, अतः चैत्र मास की नवमी को हरेला मनाया जाता है। इसी प्रकार से वर्षा ऋतु की शुरुआत श्रावण माह से होती है, अतः एक गते, श्रावण को हरेला मनाया जाता है। हरेला पर्व वैसे तो वर्ष में तीन बार आता है- पहला चैत्र मास में : प्रथम दिन बोया जाता है तथा नवमी को काटा जाता है; दूसरा श्रावण मास में : सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में बोया जाता है और दस दिन बाद श्रावण के प्रथम दिन काटा जाता है; तीसरा आश्विन मास में : आश्विन मास में नवरात्र के पहले दिन बोया जाता है और दशहरा के दिन काटा जाता है।
लेकिन उत्तराखण्ड में श्रावण मास में पड़ने वाले ‘हरेला’ को ही अधिक महत्व दिया जाता है क्योंकि श्रावण मास शंकर भगवान जी का विशेष प्रिय माह है।उत्तराखण्ड एक पहाड़ी प्रदेश है और पहाड़ों पर ही भगवान शंकर का वास माना जाता है। इसलिए भी उत्तराखण्ड में श्रावण मास में पड़ने वाले हरेला का अधिक महत्व है।
हरेला त्यौहार से नौ दिन पहले घर के भीतर स्थित मन्दिर में या ग्राम के मन्दिर के भीतर सात प्रकार के अन्न (जौ, गेहूं, मक्का, गहत, सरसों, उड़द और भट्ट) को रिंगाल की टोकरी में बोया जाता है। बोते समय पहले रिंगाल की टोकरी में एक परत मिट्टी की बिछाई जाती है, फिर इसमें बीज डाले जाते हैं। तत्पश्चात फिर से मिट्टी डाली जाती है, फिर से बीज डाले जाते हैं, यही प्रक्रिया पाँच या छः बार अपनाई जाती है। इसे सूर्य की सीधी रोशनी से बचाया जाता है और प्रतिदिन सुबह पानी से सींचा जाता है। ९ वें दिन इनकी पाती (एक स्थानीय वृक्ष) की टहनी से गुड़ाई की जाती है और दसवें यानि कि हरेले के दिन इसे काटा जाता है। काटने के बाद गृह स्वामी द्वारा इसे तिलक-चन्दन-अक्षत एवं “रोग, शोक निवारणार्थ, प्राण रक्षक वनस्पते, इदा गच्छ नमस्तेस्तु हर देव नमोस्तुते मन्त्र द्वारा अभिमंत्रित किया जाता है, जिसे हरेला पतीसना कहा जाता है। उसके बाद इसे देवता को अर्पित किया जाता है, तत्पश्चात घर की बुजुर्ग महिला सभी सदस्यों को हरेला पूजती हैं। हरेला पूजने का अर्थ है कि हरेला सबसे पहले पैरो, फिर घुटने, फिर कन्धे और अन्त में सिर में रखा जाता है और आशीर्वाद स्वरुप यह पंक्तियां कहीं जाती हैं:

“जी रया जागि रया आकाश जस उच्च,

धरती जस चाकव है जया स्यावै क जस बुद्धि, 

सूरज जस तराण है जौ सिल पिसी भात खाया,

जाँठि टेकि भैर जया, दूब जस फैलि जया…”

अर्थात ‘जीते रहिये, जागते (जागृत) रहिये। आकाश जैसी ऊँचाई, धरती जैसा विस्तार, सियार की सी बुद्धि, सूर्य जैसी शक्ति प्राप्त करो। आयु इतनी लम्बी हो कि चावल भी सिल में पीस के खायें और बाहर जाने को लाठी का सहारा लो, दूब की तरह फैलते रहो ।”
हरेला घर-घर में बोया जाता है, लेकिन किसी-किसी गाँव में हरेला पर्व को सामूहिक रुप से ग्राम देवता के मंदिर में भी मनाये जाने का प्रावधान है और पुजारी द्वारा सभी को आशीर्वाद स्वरुप हरेले के तिनके प्रदान किय जाते हैं।

                                               आप सभी स्नेही बुद्धिजीवी जनों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।

 

घनश्याम चंद्र जोशी,     सम्पादक
आकाश ज्ञान वाटिका न्यूज़ पोर्टल,
ए-१९२, नेहरू कॉलोनी, देहरादून

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!