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विश्वविख्यात पर्यावरणविद एवं चिपको आंदोलन के प्रणेता सुन्दरलाल बहुगुणा का निधन, एक अपूर्णीय क्षति

[box type=”shadow” ]हमेशा याद रहेगा :

क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार।
मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार।  

 : पर्यावरणविद सुन्दरलाल बहुगुणा[/box]

आकाश ज्ञान वाटिका, 21 मई 2021, शुक्रवार, देहरादून। ने 94 वर्ष की उम्र में आज, शुक्रवार, 21 मई 2021 को AIIMS ऋषिकेश में दोपहर करीब 12:00 बजे अंतिम साँस ली। कोरोना संक्रमित होने के कारण 8 मई 2021 को उन्हें एम्स ऋषिकेश में भर्ती भर्ती किया गया था। विश्वविख्यात पर्यावरणविद एवं चिपको आंदोलन के प्रणेता सुन्दरलाल बहुगुणा

विख्यात पर्यावरणविद एवं चिपको आन्दोलन के प्रणेता सुन्दरलाल बहुगुणा का जन्म 9 जनवरी सन 1927 को देवभूमि उत्तराखंड के मरोड़ा, सिलयारा (टिहरी गढ़वाल) नामक स्थान पर हुआ। प्राथमिक शिक्षा के ग्रहण करने के उपरांत बैचलर ऑफ़ आर्ट की पढ़ाई के लिए वे लाहौर चले गए। 23 साल की उम्र में उनका विवाह हो गया और उसके उपरांत उन्होंने अपने गाँव में रहने का फैसला लिया तथा देवभूमि की सुन्दर पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक आश्रम बनाया। तत्पश्चात उन्होंने अनेकों पर्यावरण एवं समाज के हित के कार्यों की कमान सँभाली। जंगलों व पेड़ों की सुरक्षा एवं इलाके में नशे/शराब के खिलाफ मोर्चा खोला। 1960 के दशक में उन्होंने अपना ध्यान वन और पेड़ की सुरक्षा पर केंद्रित कर लिया। चिपको आन्दोलन में अहम भूमिका निभाने के कारण वे विश्वभर में “वृक्षमित्र” के नाम से प्रसिद्ध हो गए।
इतना ही नहीं उनका योगदान समाज के हर क्षेत्र एवं हर वर्ग के विकास के लिए निरंतर रहा। दलित वर्ग के विद्यार्थियों के विकास एवं उत्थान के लिए संवेदनशील, सुन्दरलाल बहुगुणा ने टिहरी में ‘ठक्कर बाप्पा होस्टल’ की स्थापना की तथा दलितों को मंदिर में प्रवेश का अधिकार दिलाने के लिए संघर्षरत रहे।

पर्यावरणविद सुन्दरलाल बहुगुणा को आजीवन वन एवं पेड़ों से अत्यधिक स्नेह रहा इसीलिए वह पेड़ों को काटने से रोकने के लिए चिपको आन्दोलन के प्रणेता बने एवं वृक्षारोपण को अत्यधिक बढ़ावा देते रहे। साहित्य से भी उनकी विशेष रुची रही और उन्होंने ‘धरती की पुकार’, ‘भू प्रयोग में बुनियादी परिवर्तन की ओर’ एवं ECOLOGY IS PERMANENT ECONOMY किताबें लिखी। पर्यावरण एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अनेकों महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए उन्हें वर्ष 1980 में अमेरिका की Friend Of Nature नामक संस्था ने पुरस्कृत किया। इसके अतिरिक्त उन्हें वर्ष 1980 में ‘जमनालाल बजाज पुरस्कार’, वर्ष 1987 में ‘राइट लिविलिहुड अवार्ड’, वर्ष 1989 में IIT रुड़की द्वारा ‘डीएससी’ की मानद उपाधि एवं वर्ष 2009 में ‘पद्म विभूषण’ आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

आज यह महान विभूति हमारे बीच नहीं रहे परन्तु उनके सामाजिक कार्य एवं उनकी प्रेरणायें हमेशा हमारे साथ रहेंगी। हमारे द्वारा पर्यावरण संरक्षक एवं सामाजिक विकास व उत्थान के कार्य, उनकी प्रेरणाओं के अनुरूप करना ही, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

[box type=”shadow” ]आकाश ज्ञान वाटिका’ परिवार विश्वविख्यात पर्यावरणविद एवं चिपको आंदोलन के प्रणेता सुन्दरलाल बहुगुणा के निधन पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पर्यावरण एवं सामाजिक क्षेत्र में उनकी प्रेरणा के अनुरूप निरंतर कार्य करने का संकल्प लेता है।[/box]

 

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Ghanshyam Chandra

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