Breaking News :
>>हिंसा पीड़ित महिलाओं के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर होगा और अधिक सक्रिय>>आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था लागू करना अनिवार्य>>चारधाम यात्रा पूरी तरह सुरक्षित, श्रद्धालु अफवाहों पर न दें ध्यान- हेमंत द्विवेदी>>केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और सीएम धामी ने जसपाल राणा को दी श्रद्धांजलि>>मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन योजना का असर, उत्तराखंड की सपना राणा को जर्मनी में मिली नर्स की नौकरी>>तुरंत जारी करें 211 एकल महिलाओं को पैसा- रेखा आर्या>>रिखणीखाल पहुंचीं डीएम स्वाति भदौरिया, विभिन्न क्षेत्रों का किया निरीक्षण>>हल्द्वानी में जूते के शोरूम में लगी भीषण आग, लाखों का सामान जलकर हुआ राख>>श्रद्धा कपूर की नई फिल्म ‘ईठा’ का टीजर रिलीज>>हिंसा पीड़ित महिलाओं के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर होगा और अधिक सक्रिय>>सूबे में चलाया जायेगा ‘खेत बचाओ, जीवन बचाओ’ अभियान- डाॅ. धन सिंह रावत>>अवैध निर्माणों पर एमडीडीए का शिकंजा, ऋषिकेश में तीन निर्माणाधीन भवन सील>>मानसून से पहले सरकार सतर्क, पर्वतीय क्षेत्रों में पहुँचाया तीन माह का राशन>>वर्षा की कमी की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह तैयार- गणेश जोशी>>समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास करने वालों के खिलाफ की जाएगी कानूनी कार्रवाई- सीएम>>मानसून से पहले सरकार सतर्क, पर्वतीय क्षेत्रों में पहुंचाया तीन माह का राशन>>मुख्य सचिव ने दिए राज्य के सभी भवनों का फायर सेफ्टी ऑडिट करने के निर्देश>>28 से 30 जून तक चलेगा राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान>>भूमि प्रबंधन एवं सुधारों के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए- मुख्य सचिव>>शिवपुरी चौकी प्रभारी विनोद कुमार शर्मा की सड़क हादसे में मौत
उत्तराखण्ड

सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा अतिक्रमण केस की सुनवाई 2 दिसंबर तक टाली

नैनीताल। बहुचर्चित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद अगली तारीख 2 दिसंबर तय कर दी है। अदालत ने हाईकोर्ट के हटाए जाने वाले आदेश पर लगी अंतरिम रोक को यथावत रखने का निर्देश दिया।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। यह याचिका अब्दुल मतीन सिद्दीकी द्वारा दायर लीव-टू-अपील से संबंधित है, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट की उस खंडपीठीय व्यवस्था को चुनौती दी है, जिसमें बनभूलपुरा क्षेत्र से रेलवे अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए थे।

सुनवाई के दौरान रेलवे, राज्य सरकार और प्रभावित पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। रेलवे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वार्या भाटी ने दलील देते हुए कहा कि रेल परियोजनाओं के विस्तार और निर्माण के लिए कुल 30 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इस भूमि पर मौजूद अतिक्रमण को हटाए बिना रेल सेवा विकास संभव नहीं है, इसलिए अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए।

राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक अत्रे ने पक्ष रखा।

वहीं कब्जेदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, प्रशांत भूषण और अन्य वकीलों ने रेलवे के दावों पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जिस भूमि की मांग रेलवे अब कर रहा है, वह उसके पहले दिए गए लिखित दावे में शामिल नहीं थी। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि निर्माणाधीन रिटेनिंग वॉल के बाद रेलवे के ढांचे को कोई खतरा नहीं बचता।

कब्जेदारों की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विस्थापन के प्रस्ताव का भी विरोध किया गया। उनका कहना था कि बनभूलपुरा के निवासियों को जबरन हटाकर किसी अन्य स्थान पर बसाना अनुचित है। इस पर रेलवे के अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध जताया।

अब अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को करेगी।

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!