Breaking News :
>>ऋषिकेश में नशा रोकने पर माँ को गोली मारने की घटना से स्तब्ध महिला आयोग>>जनता मिलन में 21 शिकायतों पर डीएम सख्त, समयबद्ध एवं संतोषजनक निस्तारण के दिए निर्देश>>आरोपियों से जुड़े लोगों को जांच समिति में शामिल करना गलत- गोदियाल>>तीन दिन में पोर्टल पर प्रोजेक्ट अपलोड करें विभाग- मुख्य सचिव>>मानसून में दही खाना सही है या नहीं? जानिए क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ>>सेवा पखवाड़ा सरकार और जनता के बीच भरोसे का सेतु- महाराज>>वीकेंड पर ‘अल्फा’ की कमाई में आया उछाल, फिल्म ने तीन दिन में कमाए इतने करोड़ रुपये>>महाराज ने पोखड़ा में ₹60 लाख की लागत से निर्मित आवासीय भवन का किया लोकार्पण>>कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से मिले लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अजय कुमार सिंह>>सीएम धामी ने रामनगर में ₹29.65 करोड़ की लागत से नवनिर्मित धनगढ़ी पुल का किया लोकार्पण>>सेवा, सुशासन एवं समर्पण के साथ जनहित में कार्य कर रही धामी सरकार- गणेश जोशी>>देहरादून में सुरक्षा जवानों की भर्ती हेतु विकासखंड स्तर पर होंगे रोजगार शिविर आयोजित>>सेवा, सुशासन और समर्पण का सशक्त संदेश बना ‘सेवा पखवाड़ा’>>7 जुलाई 2026 तक जमा करें गणना प्रपत्र, नहीं तो छूट सकता है मतदाता सूची में नाम>>राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने देहरादून जनपद को ₹219.29 करोड़ की 51 विकास योजनाओं की दी सौगात>>‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण: जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम का शुभारंभ>>ऋतु खंडूरी ने किया कोटद्वार के मोटाढांग में ₹1.47 करोड़ की पेयजल योजना का शिलान्यास>>बदरीनाथ धाम के चढ़ावा चोरी पर जवाब दे सरकार- कांग्रेस>>स्वामी विवेकानंद का जीवन आत्मविश्वास, सेवा और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण- मुख्यमंत्री धामी>>‘अल्फा’ की बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत, फिल्म ने पहले दिन कमाए इतने करोड़ रुपये
उत्तराखण्डधार्मिकसामाजिकसामाजिक गतिविधियाँ

अनुपम व पवित्र संस्कृति तथा कलाओं के भण्डार हैं हमारे गाँव

आकाश ज्ञान वाटिका। शुक्रवार, ४ अक्टूबर।
उत्तराखण्ड के गाॅवों की अपनी एक अनुपम व पवित्र संस्कृति है। पहाड़ की खुशनुमा वादियों में जब एक शिशु जन्म लेता है तब से शुरू हो जाता है संस्कारों का सिलसिला। घर, परिवार, पड़ोस, गाॅव फिर इलाका सब झूम उठते हैं, एक किलकारी में। फूल बरसा एक माॅ के आँचल में, जिस पर पूरा इलाका ही खुशबू से महक उठा। मन्द सुगन्ध, शीतल पवन अपने संग वहाॅ ले गयी खुशियों की एक लहर, जिससे महका हर घर, आँगन , बिन पूछे जाति-पाति व धर्म। खुशियों के इस पल में फिर लगने लगी बधाइयों की होड़, जिसने स्थापित किया अपनत्व का वह श्रेष्ठ स्तम्भ। प्रत्येक घर की खुशी के लिये लालायित व मनोकामना करता है पूरा पहाड़/इलाका। कोई किसी की तनिक भी पीड़ा नहीं देख सकता था। किसी को कष्ट देना तो हमारी संस्कृति को कभी मंजूर ही नहीं रहा। बड़े-बुजुर्गों को देख स्वतः ही झुक जाती है थी बेटे, बहु-बेटियाॅ व बच्चों की निगाहें, जो दर्शाती है बड़ों के प्रति छोटों का अटूट सम्मान, बदले में मिलता है छोटों को बड़ों से अटूट प्रेम-स्नेह।

गॅवों में आज भी तीज-त्यौहार बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाये जाते हैं। चाहे दिवाली हो या होली, हरेला या संक्रांति, लोग एक-दूसरे को मिठाईयाॅ देते हैं, तथा आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिससे अपनत्व की भावना स्वतः ही पैदा होने लगती है। कोई भी पर्व दिखावा मात्र नहीं मनाया जाता है। गाॅव के लोग, हर पर्व को पूरे रीति-रिवाज से मनाते हैं। चाहे जो भी कार्य हो, गाॅव के लोग हमेशा अपनी संस्कृति व कलाओं का ध्यान रखते हैं। यदि रिश्ते-नातों की वास्तविकता कहीं दिखती है तो निष्चित रूप से गाॅवों के लोगों के बीच दिखती है।

गाॅवों में आज भी संयुक्त परिवार देखने को मिलते हैं। यद्यपि संयुक्त परिवार शहरों में भी होते हैं परन्तु इनकी संख्या गाॅवों की अपेक्षा काफी कम होती है। गाॅवों में संयुक्त परिवारों का जो सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व होता है वह शहरों में नहीं होता है। गाॅवों के सदस्यों के बीच सम्बन्ध इतने घनिष्ठ होते हैं कि बड़े से बड़ा कार्य वे आपस में मिलकर कर लेते हैं। गाॅवों में अपराधिक घटनायें शहरों की तुलना में बहुत कम होती हैं। यहाॅ लोग भगवान के नाम से डरते हैं तथा धार्मिक नियमों के अनुरूप समस्त कार्य करते हैं। जाति-धर्म के बन्धन से मुक्त होकर लोग, उम्र का लिहाज कर एक उचित रिश्ते के अनुसार आपस में व्यवहार करते हैं। धन-दौलत के अभाव के बीच जो जिन्दगी एक ग्रामीण बिताता है, शायद ही वैसी जिन्दगी एक विकसित शहर में मिल पाये। भौतिकवादी इस युग में यदि सुकून है तो वह केवल गाॅवों में है। भारत में गाॅवों का एक महत्वपूर्ण स्थान है।

भारत की अधिकांश जनसंख्या इन्हीं गाॅवों में निवास करती है। भारत एक कृषि प्रधान देश है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन यापन का मुख्य साधन ही कृषि है। अन्त में हम कह सकते हैं कि देश की अर्थ व्यवस्था व सामाजिक संतुलन में गाॅवों की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। जो शुद्ध व शान्त वातावरण गाॅवों में मिलता है वह कभी भी शहरों में नहीं मिल सकता। आज हमें गाॅवों को विकसित करने की जरूरत है। ग्रामीणों का जीवन स्तर विकसित करने के लिये नीति बनाई जाय। हमें यदि भविष्य में सुखी जीवन यापन करना है तो गाॅवों को बचाना अति आवश्यक है।

भला कौन भुला सकता है उन खूबसूरत व मनमोहक नजारों को, जब गाँवों में शादी-ब्याह, तीज-त्यौहारों के मौकों पर सारे लोग मिलकर पंगत (पंक्तिबद्ध) में बैठकर बड़े – बड़े ताँबे के बर्तनों में बने शुद्ध व पवित्र भोजन का मजा लेते हैं। पहाड़ के लोगों का पहनावा तो अपने आप में अनूठा है, मनमोहक है।
हमें अपनी संस्कृति, कलाओं व रीति-रिवाजों का हमेशा सम्मान करना चाहिए।

 

जय हिन्द । जय उत्तराखण्ड ।

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!