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योगी जी का नया फरमान

साभार : अजय दीक्षित
आकाश ज्ञान वाटिका, शनिवार, 05 अक्टूबर 2024, देहरादून। योगी ने पिछले दिन फिर आदेश निकाला है कि खान-पान वाले अपने मालिक और मैनेजर का नाम लिखेंगे। सभी कर्मचारियों के नाम भी घोषित होना चाहिए ? खाना बनाने वाले मास्क और दस्ताना पहनें। कुछ समय पहले कांवड़ के समय में योगी ने आदेश निकाला था कि सभी खाद्य पदार्थ बेचने वाले, यहॉं तक कि ढेले वाले भी नाम घोषित करेंगे। योगी का आरोप था कि बहुत से मुसलमान अपनी दुकान का नाम हिन्दू देवी देवताओं के नाम पर रख लेते हैं और इससे हिन्दू कांवडि़ए मुसलमान की दुकान का खाना खा लेते हैं। अब हिन्दू धर्मशास्त्र के जानकारों का कहना है कि यह कहीं नहीं लिखा है कि दूसरे धर्म वाले का दिया खाना खाने से कोई पथ भ्रष्ट हो जाता है। तब तो केवल ब्राह्मण के हाथ का बना खाना ही खाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। स्वच्छता अच्छी चीज है, परन्तु इसे जाति या धर्म से जोडऩा ठीक नहीं है । कहते हैं वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के भगवान के कपड़े मुस्लिम महिलाएं सिलती हैं। अलमें भाजपा के कुछ लोग देश को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। अब भाजपा वाले कहते हैं कि कांग्रेस के कारण देश का विभाजन हुआ। अब कुछ मुसलमानों के साथ तो हम नहीं रह सकते, फिर देश का विभाजन नहीं होता तो क्या दोनों सम्प्रदाय के लोग शांति से रह सकते थ। वीर सावरकर ने भी लिखा है कि हिन्दू राष्ट्र में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं हैं। असलियत यह है कि हिन्दू महासभा ने बंगाल और सिंध में मुस्लिम लीग के साथ मिलकर प्रांतीय सरकार बनाई थी। असल में योगी साधु संत भी बना रहना भी चाहते हैं तो राजनीति भी करना चाहते हैं । देश की बहुत प्रतिष्ठित संस्था गोरखनाथ पीठ के वे अधिष्ठाता हैं। परन्तु साधु होने के कारण वे अपने पिता की मौत के बाद दाह संस्कार में शामिल नहीं हुए। अब यह दोहरी नीति कैसे चल सकती है। योगी दूसरी बार के मुख्यमंत्री हैं। अभी जो आदेश निकाला है वह पहले क्यों नहीं निकाला। असल में उत्तर प्रदेश में दस सीटों पर उप चुनाव होने हैं।

हिन्दी वोट साधने के लिए यह नया आदेश आया है, विपक्ष ऐसा आरोप लगाता है। यह भी कहा जाता है कि वे देश के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। यद्यपि मोदी के बाद अमित शाह का ही नम्बर है। विपक्ष का यह भी आरोप है कि योगी जी और अमित शाह के बीच सम्बन्ध मधुर नहीं है।

अभी कश्मीर में चुनावी भाषण देते हुए अमित शाह ने घोषणा की कि वे ईद और मोहर्रम पर फ्री गैस सिलेण्डर देंगे। असल में जम्मू कश्मीर में यदि भाजपा अपनी सरकार बनना चाहती है तो उसे कश्मीर को साधना पड़ेगा और कश्मीर में बहु संख्यक हिन्दू नहीं, मुसलमान है। अब यदि कश्मीर में ईद और मोहर्रम पर फ्री गैस सिलेण्डर मिलेगा तो यह देश के अन्य राज्यों में रहने वाले मुसलमानों को क्यों नहीं ?
भारत के लिए हिन्दू राष्ट्र की कल्पना करना एक बड़ा खतरनाक खेल है और देशहित में नहीं होगा, ऐसा बहुतों का मानना है।

Ghanshyam Chandra

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